लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जब बीच सड़क पर मर्यादा की धज्जियां उड़ाने लगे, तो समझिए कि कलम की स्याही में ‘दलाली और वसूली’ का जहर घुल चुका है! आज बात उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर की, जहाँ खुद को एक बड़े न्यूज चैनल का सिपाही बताने वाले कथित ‘वसूली गुरु’ पत्रकार सुमित गर्ग का एक नया कारनामा बीच सड़क पर नंगा हो गया है।
सोशल मीडिया पर सिर्फ 6 सेकंड का एक वीडियो रेंग रहा है, लेकिन इन 6 सेकंडों ने पत्रकारिता की गरिमा का ऐसा चीरहरण किया है कि पूरा मिर्ज़ापुर दंग है। एक तरफ न्यूज़ 18 का यह विवादित स्ट्रिंगर, और दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता शिव शंकर यादव के माननीय ड्राइवर साहब! बीच सड़क पर दोनों के बीच ‘तू-तू मैं-मैं’ हो रही है, गालियों की ऐसी बौछार हो रही है मानो किसी पेशेवर गुंडे-मवाली की ट्रेनिंग ली हो। ड्राइवर सरेआम चिल्ला रहा है—”दलाल है तू!”। अब सवाल यह है कि आखिर इस ‘दलाली’ और ‘वसूली गुरु’ के पीछे का असली खेल क्या है?
दर्शकों, अगर आपको लग रहा है कि यह सुमित गर्ग का कोई पहला विवाद है, तो आप गलत हैं। इस स्ट्रिंगर का इतिहास विवादों, धमकियों और ब्लैकमेली के आरोपों से सना पड़ा है।
* सूत्रों की माने तो पहला बड़ा खुलासा (व्यापारियों को जान से मारने की धमकी): चर्चित मीडिया वेबसाइट की रिपोर्ट्स गवाह हैं कि इस स्ट्रिंगर की गुंडागर्दी और व्यापारियों को जान से मारने की धमकियों की खबरें पहले भी सुर्खियां बन चुकी हैं।
* स्वर्ण व्यवसायियों की लिखित शिकायत: मिर्ज़ापुर के चार बड़े स्वर्ण व्यवसायियों ने तंग आकर सीधे चैनल के ऑफिशियल मेल पर लिखित शिकायत भेजी थी। आरोप था कि यह शख्स उन्हें ब्लैक मेल कर मोटी रकम ऐंठने की कोशिश कर रहा था।
* वरिष्ठ चेहरों तक शिकायत: चार साल पहले भी इसके कारनामों का कच्चा चिट्ठा चैनल के बड़े चेहरों जैसे अमीश देवगन और मनमोहन राय के वॉट्सऐप नंबरों तक भेजा गया था। आरोप तो यह भी हैं कि साल 2014-15 में जब ब्रजेश मिश्रा (जो अब भारत समाचार के सर्वेसर्वा हैं) चैनल के प्रमुख चेहरा थे, तब इसकी नियुक्ति हुई थी और उनके ‘भक्तों’ की छत्रछाया के कारण ही इसके हर पाप पर पीछे के रास्ते से परदा डाल दिया जाता था।
अब आइए बात करते हैं इस ताजा तमाशे की। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वीडियो भले ही 6 सेकंड का हो, लेकिन बैकस्टोरी बहुत लंबी है। मामला सिर्फ गाली-गलौज तक नहीं था, बल्कि बात कॉलर पकड़ने और गुंडई दिखाने तक पहुंच गई थी।
इस विवाद की असली जड़ क्या है?
* अवैध कब्जे की दलाली: सूत्रों और स्थानीय दावों के मुताबिक, इस पूरे विवाद के पीछे एक विवादित जमीन है। आरोप है कि इस ‘वसूली गुरु’ पत्रकार ने प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ कर एक जमीन पर अवैध कब्जा करवाया।
* पैसे के लेन-देन में फूट: जब उस अवैध कब्जे से मिली दलाली के पैसे और आपसी फायदे का बंदरबांट सही से नहीं हुआ, जब आपसी सामंजस्य बिगड़ गया, तो दोनों पक्ष बीच सड़क पर ही एक-दूसरे के कपड़े फाड़ने पर उतारू हो गए।
* गंभीर आरोप: हद तो तब हो गई जब ताजा मामलों में एक पीड़ित व्यापारी की पत्नी (महिला) को भी अपने जाल में फंसाने और परेशान करने के गंभीर आरोप इस स्ट्रिंगर पर लग रहे हैं।
यहाँ सबसे बड़ा सवाल उस न्यूज़ नेटवर्क से है, जिसने अतीत में लखनऊ में एक रिपोर्टर की गाड़ी से एक्सीडेंट होने और मोटी रकम बरामद होने पर तुरंत इस्तीफा ले लिया था। फिर आखिर इस ‘वसूली गुरु’ स्ट्रिंगर में ऐसा कौन सा सुरखाब का पर लगा है कि कई सालों से चैनल अपनी बदनामी झेल रहा है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती? क्या किसी गॉडफादर का हाथ इसके सिर पर है?
यह घटना पूरे पत्रकार समुदाय को शर्मसार करने वाली है। हम मिर्ज़ापुर के पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों से पुरजोर अपील करते हैं कि इस वीडियो और सुमित गर्ग के पुराने आपराधिक व वसूली वाले इतिहास का स्वतः संज्ञान लें। पत्रकारिता के नाम पर चल रहे इस गुंडागर्दी और जमीनों के धंधे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और दलाली का दलाल सामने आ सके!
फिलहाल के लिए इस विशेष बुलेटिन में इतना ही। देश, प्रदेश और मीडिया जगत की हर बड़ी और बेबाक खबर के लिए देखते रहिए दैनिक विवाद मुद्दे की बात हम फिर लेकर आएंगे आपके सामने एक बेबाक समाचार देखते रहिए दैनिक विवाद मिलते हैं फिर अगले एपिसोड में। नमस्कार।
एक वरिष्ठ पत्रकार की रिपोर्ट के आधार पर
