सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निधि तिवारी की आत्महत्या की खबर में पत्रकार निधि तिवारी की तस्वीर इस्तेमाल होने का दावा, पत्रकार ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली। पत्रकारिता में किसी खबर की पुष्टि और उससे जुड़ी तस्वीर का सही व्यक्ति से मिलान कितना महत्वपूर्ण है, इसका एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निधि तिवारी की आत्महत्या से जुड़ी खबरों में कथित तौर पर एबीपी न्यूज से जुड़ी पत्रकार निधि तिवारी की तस्वीर इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
बताया जा रहा है कि News18 India और TV9 Bharatvarsh पर प्रसारित/प्रकाशित खबर में नाम की समानता के कारण तस्वीर की पहचान में गलती हो गई। खबर जिस निधि तिवारी से संबंधित थी, वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताई जा रही हैं, जबकि इस्तेमाल की गई तस्वीर पत्रकार निधि तिवारी की होने का दावा किया गया है।
एक नाम ने पैदा कर दिया बड़ा भ्रम
मामला मूल रूप से एक ही नाम वाली दो अलग-अलग महिलाओं से जुड़ा नजर आ रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निधि तिवारी की आत्महत्या की खबर सामने आने के बाद संबंधित खबर में दूसरी निधि तिवारी की तस्वीर इस्तेमाल होने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
ऐसी स्थिति में तस्वीर प्रकाशित करने से पहले व्यक्ति की पहचान, सोशल मीडिया प्रोफाइल, संस्थान और उपलब्ध अन्य विवरणों का मिलान करना पत्रकारिता की बुनियादी सावधानियों में शामिल माना जाता है।
पत्रकार निधि तिवारी ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
मामले को लेकर पत्रकार निधि तिवारी ने News18 India को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा—
“न्यूज18इंडिया वालों भांग खाकर बैठे हो क्या?
निधि तिवारी नाम की सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर की सुसाइड की खबर में मेरी फोटो चला दी।
कम से कम खबर चलाने से पहले ये तो वेरीफाई तो कर लिया करो कि जिस इंसान की फोटो लगा रहे हो वो वही है भी या नहीं।”
पत्रकार की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भी खबरों में तस्वीरों की पुष्टि और संपादकीय स्तर पर फैक्ट-चेकिंग को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
तस्वीर की एक गलती, असर बहुत बड़ा
किसी व्यक्ति की तस्वीर को आत्महत्या जैसी संवेदनशील खबर के साथ प्रकाशित करना महज तस्वीर की गलती नहीं रह जाती। इससे संबंधित व्यक्ति की सामाजिक और पेशेवर छवि पर गंभीर असर पड़ सकता है और पाठकों के बीच गलत धारणा बन सकती है।
खास तौर पर पत्रकार, सार्वजनिक व्यक्तित्व या किसी पेशेवर व्यक्ति के मामले में ऐसी गलती से यह भ्रम पैदा हो सकता है कि खबर उसी व्यक्ति से संबंधित है।
डिजिटल पत्रकारिता में वेरिफिकेशन क्यों जरूरी?
डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार में खबर सबसे पहले देने की होड़ रहती है, लेकिन तस्वीर और पहचान की पुष्टि उतनी ही जरूरी है। एक जैसे नाम वाले लोगों के मामले में खबर प्रकाशित करने से पहले कम से कम नाम, संस्थान, उम्र/प्रोफाइल, सोशल मीडिया अकाउंट और उपलब्ध तस्वीर का मिलान किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खबर प्रकाशित करने से पहले तस्वीर और संबंधित व्यक्ति की पहचान का पर्याप्त सत्यापन किया गया था?
फिलहाल पत्रकार निधि तिवारी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस कथित तस्वीर-गलती को चर्चा में ला दिया है। संबंधित मीडिया संस्थानों की ओर से इस मामले में क्या स्पष्टीकरण या सुधार जारी किया जाता है, यह देखना बाकी है।
