जंतर-मंतर पर पुलिस बनाम पत्रकार! रिपोर्टिंग रोकने और महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी पर प्रेस क्लब का फूटा गुस्सा
प्रदर्शन कवर करने पहुंचे पत्रकारों से पुलिस का कथित दुर्व्यवहार, महिला पत्रकार के साथ आपत्तिजनक हरकत के आरोप ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली। लोकतंत्र में प्रदर्शन हो और उसे कवर करने वाला मीडिया पुलिस की कथित सख्ती के घेरे में आ जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को उनके कामकाज से कथित तौर पर रोकने और एक महिला पत्रकार के साथ आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला सामने आने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कड़ा विरोध जताते हुए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकारों को काम करने से रोकना कितना जायज?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे पत्रकारों का काम घटनाक्रम को जनता तक पहुंचाना था। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने से रोकने की कोशिश की।
सवाल सीधा है—अगर सार्वजनिक स्थान पर हो रहे प्रदर्शन की रिपोर्टिंग भी पत्रकार नहीं कर पाएंगे तो लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका क्या रह जाएगी?
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इसी मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए पत्रकारों के पेशेवर काम में कथित हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई है।
महिला पत्रकार से कथित आपत्तिजनक हरकत ने बढ़ाई गंभीरता
मामले का सबसे गंभीर पहलू एक महिला पत्रकार के साथ कथित आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप है। प्रेस क्लब ने इस घटनाक्रम पर विशेष चिंता जताई है और दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह आरोप सही है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। लेकिन यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल सिर्फ एक महिला पत्रकार से बदसलूकी का नहीं रहेगा, बल्कि ड्यूटी पर मौजूद पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान का भी होगा।
पुलिस का काम सुरक्षा देना है, पत्रकारिता रोकना नहीं!
कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और पत्रकारों को अपना काम करने से रोकने के बीच एक स्पष्ट अंतर है।
पत्रकारों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर विषय है। खासकर तब, जब मामला महिला पत्रकार से कथित आपत्तिजनक व्यवहार का हो।
प्रेस क्लब ने मांगा कड़ा एक्शन
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि पत्रकारों के काम में कथित हस्तक्षेप को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
अब सवाल दिल्ली पुलिस और संबंधित अधिकारियों से है—
क्या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पत्रकारों को रिपोर्टिंग से रोकने के आरोपों की जांच होगी?
महिला पत्रकार के साथ कथित आपत्तिजनक व्यवहार की शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या लोकतंत्र के प्रदर्शन स्थल पर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही असहज कर दिया गया?
फिलहाल प्रेस क्लब के विरोध के बाद मामला तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। अब देखना यह है कि संबंधित पुलिस अधिकारी इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
नोट: महिला पत्रकार से कथित आपत्तिजनक व्यवहार और पत्रकारों को रिपोर्टिंग से रोकने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि/पुलिस का पक्ष उपलब्ध होने पर खबर को उसी के अनुसार अपडेट किया जाना चाहिए।
