हरिद्वार में एक वाहन चालक के साथ कथित मारपीट का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। चालक का आरोप है कि कुछ पत्रकारों और उनके साथियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। पीड़ित चालक का कहना है कि घटना के बाद उसने मेडिकल परीक्षण करवाया और शिकायत दर्ज कराने के लिए श्यामपुर थाने पहुंचा, लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
चालक के आरोपों के अनुसार, इस पूरे विवाद में द पाइनियर के पत्रकार अरुण कश्यप, दैनिक जागरण के पत्रकार राहुल शर्मा, जनहित से जुड़े लक्ष्मण तथा हिन्दुस्तान अखबार के पत्रकार हरपाल समेत अन्य लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि कुछ लोगों ने पत्रकारिता की आड़ में प्रभावशाली अधिकारियों से करीबी संबंध बना रखे हैं और इन्हीं संबंधों के दम पर अपने निजी हित साधे जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, इन आरोपों के समर्थन में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित पत्रकार पूर्व में भी विवादों में रह चुके हैं और उनके साथ मारपीट एवं बंधक बनाए जाने से जुड़े मामले सुर्खियां बटोर चुके हैं। हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि चालक के साथ वास्तव में मारपीट हुई है तो उसकी शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगी या फिर यह मामला आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा? स्थानीय लोगों की नजर अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
