
उ.प्र. संवाददाता समिति ने शोक सभा को भी दे दी श्रद्धांजलि !
ज़िन्दगी और मौत सबसे अहम है। जन्मदिन ज़िन्दगी की नेमत बरक़रार रहने का जश्न है और मौत ज़िन्दगी खत्म होने का मातम है। जब से सोशल मीडिया आम हई है ज़िन्दगी का जश्न और मौत का मातम ए इज़हार बढ़ सा गया है। हर ख़ास-ओ-आम इंसान सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के लिए जन्मदिन मनाता है। सोशल मीडिया पर मौत की सूचनाओं से ताज़ियत (श्रद्धांजलि/सांत्वना) देने वालों की कतार लग जाती है।
कलमकारों ने भी खुशी और ग़म ज़ाहिर करने के लिए सोशल मीडिया का प्लेटफार्म चुना है।
हम अपने शोबे और पेशे की बात करें तो लखनऊ के पत्रकारों की संख्या कुछ ज्यादा ही है इसलिए हर रोज़ सोशल मीडिया पर जन्मदिन के जलसे नज़र आते हैं। (जो अच्छी बात है) और आए दिन किसी साथी के ना रहने की अफसोस नाक खबर भी हमें सोशल मीडिया के जरिए पता चल जाती है।
उत्तर प्रदेश के राज्य मुख्यालय की खबरें कवर करने वाले राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों की तादाद भी बहुत ज्यादा है। मीडिया संगठनों की अनगिनत भीड़ में क़रीब आठ-नौ सौ मान्यता प्राप्त सहाफियों की इकलौती निर्वाचित समिति का नाम है- उ.प्र. राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति। इसका चुनाव दो-तीन बरस बाद बहुत भव्यता से होता है। बताया जाता है कि इस समिति में बड़े पद का चुनाव जीतने के लिए कुछेक लोग दसियों लाख रुपए खर्च कर प्रचार करते हैं। पत्रकारों के हक़ की लड़ाई और बुरे वक्त में खड़े ना होने के आरोप भी संवाददाता समिति पर लगते रहे हैं। बावजूद इसके पत्रकारों की इस समिति की एक काबिले तारीफ परंपरा थी। किसी पत्रकार साथी की मौत का मातम मनाने,उन्हें याद करने और श्रद्धांजलि देने के लिए एनेक्सी मीडिया सेंटर में दशकों से शोक सभा का आयोजन किया जाता था। जिसमें भारी संख्या में पत्रकार इकट्ठा होकर अपने साथी और हमेशा के ग़म में शरीक होते थे। श्रद्धांजलि देते थे और मृतक के परिजनों को सांत्वना देते थे। दिवंगत माली हालत ठीक ना होने पर परिजनों को आर्थिक सहयोग देने या दिलवाने का प्रयास भी करते थे। दुर्भाग्य कि समिति की निष्क्रियता का आलम ये हो गया है कि अब ये परंपरा भी खत्म हो गई।
लखनऊ के सम्मानित, वरिष्ठ, हरदिल अज़ीज़, क़लम के जादूगर और हर किसी के सुख दुख में शरीक होने वाले पत्रकार स्वर्गीय वीर विक्रम बहादुर मिश्र का देहांत जब करीब दो माह पूर्व हुआ तो देश के दिग्गज पत्रकारों ने उन्हें संत पत्रकार की संज्ञा दी। संवाददाता समिति ने उन तक की शोक सभा नहीं की। इसके अलावा करीब चार-पांच महीने के दौरान जो भी पत्रकार दिवंगत हुआ उनकी शोक सभा की जहमत ना करके पुरानी परंपरा को तोड़ दिया गया। इस बात से आहत वरिष्ठ पत्रकार प्रभात त्रिपाठी ने स्वयं शोक सभा करने का फैसला किया है। सोमवार को मान्यता प्राप्त पत्रकार मुईज़ ख़ान की मृत्यु हो गई। इनकी याद में श्री त्रिपाठी ने शोक सभा के आयोजन की सूचना दी है-
(हर दिल अजीज पत्रकार स्वर्गीय मुइज खान ( ए एम खान)का सोमवार 12 बजे लखनऊ के पीजीआई में निधन हो गया था।उनकी आत्मा की शांति के लिये एक शोक सभा कल दिन बुधवार 2.30 पर विधानसभा प्रेस रुम में रखी गई है।सम्मानित पत्रकार साथी खान जी की आत्मा की शांति के लिये शोक सभा में उपस्थित रहे। प्रभात त्रिपाठी।)
– नवेद शिकोह
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