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एक ऐसे गुरु जो पत्रकारिता छोड़ साधू (महामंडलेश्वर) बन गए थे

 एक ऐसे गुरु जो पत्रकारिता छोड़ साधू (महामंडलेश्वर) बन गए थे

ऐसा गुरु सबको मिले !

हांलांकि वो दौर इतना बुरा नहीं था लेकिन उन्हें जैसे मालुम था की मीडिया व्यवसायिकता का ग़ुलाम बनने जा रहा है। सेटेलाइट टीवी चैनलों का सिलसिला तेज़ दिशा में आगे बढ़ने को बेताब था।
पत्रकारिता के तमाम गुरुओं में शीर्ष माधवकांत मिश्रा ने देश का पहला आध्यात्मिक टीवी चैनल नया-नया शुरू किया था। उस जमाने में तो सैटेलाइट चैनल बहुत ही ज्यादा खर्चीला था। स्लॉड बेचना थे। बाबा राम देव और अन्य बाबा व भक्ति संगीत की हस्तियां स्लॉड खरीदने के लिए लाइन लगाए थीं। मेरे एक परिचित भी स्लॉड खरीदना चाहते थे। मैंने अपने गुरु समान सीनियर (जो मेरे सम्पादक रहे थे।) माधव जी से कहा कि फलां को स्लॉड मिल सकेगा !
वो बोले- ओसामा बिन लादेन भी बाबा बन कर स्लॉड के अच्छे दाम देगा तो उसे सिर आंखों पर लिया जाएगा। मीडिया का आने वाला दौर बहुत भयावह होने वाला है।
ग़जब की अच्छी शुद्ध हिन्दी बोलने वाले मिश्रा जी कड़वी बातों को भी इतने मीठे लहजे में बोलते थे कि कभी-कभी समझ में नहीं आता था कि वो मजाक कर रहे हैं या गंभीर सच बयां कर रहे हैं।
पत्रकारिता छोड़ वो साधू (महामंडलेश्वर) बन गए थे, और फिर वो मृत्यु को प्राप्त हो गए।

उनकी कई बातें हमेशा याद आती हैं।
पहली ये कि गुरु,बॉस या संपादक कितने प्यार से और किस तरह हंसते-बोलते लाइट मूड में सिखा भी सकता है और काम भी ले सकता है।
मीडिया में शुद्ध हिन्दी का इस्तेमाल करने का जोखिम लिया जाए तो वो दिन दूर नहीं जब शुद्ध हिन्दी आम हो जाएगी, और मीडिया बाजार की डिमांड बन जाएगी।

और सबसे अहम वो भविष्यवाणी जिसमें गुरुवर ने कहा था कि टीवी मीडिया को ओसामा बिन लादेन भी रकम देगा तो उसका कंटेंट चला दिया जाएगा।
उस्ताद माधवकांत जी को खिराजे अकीदत।

 नवेद शिकोह

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