
मृत्यु एक शाश्वत सत्य है, लेकिन असमय निधन हमेशा परिवार और समाज दोनों को गहरी पीड़ा देता है। बीते कुछ वर्षों में पत्रकारिता जगत ने अपने कई जांबाज़ और सच्चाई के प्रहरी खो दिए। कोरोना काल के बाद हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं ने समाज को चिंता में डाल दिया है। इसी लहर में अब पत्रकारिता परिवार को एक और बड़ा आघात सहना पड़ा।
हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार नरेश तोमर का बुधवार को अचानक हृदयगति रुकने से निधन हो गया। नरेश तोमर अपने जीवन भर सच्चाई की राह पर डटे रहे। उनकी कलम कभी झुकी नहीं, उनकी आवाज़ हमेशा जनता के पक्ष में गूंजी। चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ आईं, उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आज वे नहीं हैं, लेकिन उनके शब्द, उनकी लेखनी और उनका संघर्ष हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेगा।
वहीं, देहरादून में अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार राकेश खंडूड़ी का जाना भी पत्रकारिता जगत के लिए किसी सदमे से कम नहीं। वे संतुलन, संयम और सत्य के प्रतीक थे। उनकी रिपोर्टिंग केवल खबर नहीं होती थी, बल्कि समाज का आईना होती थी। सहकर्मी उन्हें एक मार्गदर्शक की तरह मानते थे और उनका व्यक्तित्व हर किसी को प्रेरणा देता था।
दोनों ही पत्रकारों का जाना हमें उस समय की याद दिलाता है जब लोकप्रिय टीवी पत्रकार रोहित सरदाना ने भी असमय हम सबको अलविदा कह दिया था। रोहित सरदाना की गूंजती हुई आवाज़ और बहसों में उनकी सशक्त उपस्थिति आज भी लाखों दर्शकों को याद आती है।
आज जब हम इन नामों को स्मरण करते हैं तो दिल भारी हो उठता है। यह केवल कुछ लोगों का जाना नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के उस युग का अवसान है जो बेबाकी, साहस और जनहित के लिए खड़ा था।
नरेश तोमर और राकेश खंडूड़ी अपने पीछे अपार विरासत छोड़ गए हैं – सत्य के लिए जीने और लिखने की विरासत। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनकी कलम और उनका संघर्ष पत्रकारिता के हर नए योद्धा के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।
पत्रकारिता जगत उन्हें हमेशा याद रखेगा।
🙏 भावभीनी श्रद्धांजलि 🙏
आपकी कोई भी बात, देश में पत्रकारों से सम्बंधित खबर, सूचनाएं, किसी भी खबर पर अपना पक्ष, अगर कोई लीगल नोटिस है मेल के जरिए भेजे bhadas2medias@gmail.com
नोट – अगर आपके फोन में लिंक ना खुले तो इस नंबर को सेव कर ले लिंक खुल जाएगा इसलिए बताया जा रहा है कि कुछ पत्रकार भाईयों की शिकायत है कि लिंक नहीं खुल रहा है