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क्राइम रिपोर्टिंग के सुपर किंग विश्वजीत दादा नहीं रहे

 क्राइम रिपोर्टिंग के सुपर किंग विश्वजीत दादा नहीं रहे

क्राइम रिपोर्टिंग के सुपर किंग विश्वजीत दादा नहीं रहे

लखनऊ के सभी प्रतिष्ठित अंग्रेजी अख़बारों में क्राइम रिपोर्टिंग की लम्बी पारी खेलने वाले दिग्गज पत्रकार विश्वजीत घोष का निधन हो गया।
वो कल तक अपने कार्यालय पायनियर आए थे, आज हार्ट अटैक पड़ा जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया। लखनऊ के स्थापित अंग्रेजी ब्रॉन्ड अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया, द पायनियर, इंडियन एक्सप और हिन्दुस्तान टाइम्स में क़रीब तीन दशक से अधिक अर्से तक उन्होंने पत्रकारिता की शानदार पारी खेली। तीन दशक पहले पायनियर की शोहरत और विश्वजीत घोष जी का कैरियर शबाब पर था, इत्तेफाक कि मरहूम के करियर और जीवन का अंत भी पायनियर में हुआ। उनका सौभाग्य रहा कि ज़िन्दगी के आखिरी दिन तक वो वर्किंग रहे, मौत के एक दिन पहले कार्यालय आए।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अलावा हिन्दुस्तान टाइम्स में उन्होंने लम्बी पारी खेली। उन्हें क्रांइम रिपोर्टिंग का सुपर किंग कहा जाता था। उनकी पत्रकारिता के तरकश में सोर्सेज (सूत्रों) का ख़ज़ाना रहता था। नई पीढ़ी को रिपोर्टिंग के गुर सिखाने में भी वो आगे रहते थे। एक ज़माना था जब उत्साही युवकों की एक टीम उनके साथ रहती थी। जब वो हिन्दुस्तान टाइम्स में थे तब एक मामले में पत्लकारिता के इस रौशन चांद में ग्रहण सा लग गया था।
लेकिन वो हारे नहीं, हतोत्साहित नहीं हुए। तीन दशक से अधिक समय तक निरंतर पत्रकारिता के पेशे में डटे रहे,पर ज़िन्दगी की बैटिंग के दौरान मौत के शाश्र्वत सत्य ने उन्हें आउट कर दिया।
काश हर पत्रकार को आपकी जैसी मौत नसीब हो। ज़िन्दगी की सांसों के साथ ही क़लम थमें।
अलविदा विश्वजीत दादा
– नवेद शिकोह

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