हरिद्वार (ज्वालापुर)। मस्जिद, मदरसा व कब्रिस्तान की धनराशि को व्यक्तिगत या घरेलू कार्यों में उपयोग करना इस्लाम धर्म में बड़ा गुनाह माना गया है, लेकिन वर्तमान समय में ऐसे मामलों का सामने आना चिंताजनक है। जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोग धार्मिक स्थलों को अपनी निजी संपत्ति समझकर उनके नाम पर अवैध वसूली करने से भी नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला वक्फ कब्रिस्तान, सुभाषनगर ज्वालापुर से सामने आया है। बाबर कॉलोनी, ईदगाह रोड ज्वालापुर निवासी साजिद व माजिद पुत्रगण हमीद ने उपजिलाधिकारी हरिद्वार को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी माता सगरीन पत्नी हमीद का इंतकाल दिनांक 28 जुलाई 2025 को हुआ था, जिन्हें उक्त वक्फ कब्रिस्तान में दफन किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, माता के मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कब्रिस्तान कमेटी की दफन की रसीद की आवश्यकता है, लेकिन वक्फ कब्रिस्तान कमेटी के अध्यक्ष / पत्रकार अहसान अंसारी रसीद देने से मना कर रहे हैं और इसके एवज में 2500 रुपये की मांग की जा रही है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल के आदेश दिनांक 14.06.2018 के अनुसार किसी भी व्यक्ति के दफन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। इस आदेश का बोर्ड स्वयं कब्रिस्तान कमेटी द्वारा कब्रिस्तान के गेट पर लगाया गया है, इसके बावजूद कमेटी अध्यक्ष द्वारा आदेश की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। पीड़ित साजिद ने प्रशासन से मांग की है कि कब्रिस्तान कमेटी के अध्यक्ष अहसान अंसारी पुत्र इसरार अंसारी, निवासी मोहल्ला पांवधोई, ज्वालापुर के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए तथा उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवश्यक दफन की रसीद तत्काल दिलवाई जाए। इस मामले ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि धार्मिक स्थलों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। शासन प्रशासन को इस और गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है।
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