हरिद्वार में पत्रकारिता के नाम पर चल रहे अंदरूनी खेल की परतें अब खुलने लगी हैं। गैस एजेंसी विवाद में मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला अब और ज्यादा पेचीदा हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि अर्चना धींगरा ने पूरे मामले का ठीकरा सीधे तौर पर देवम मेहता के सिर फोड़ दिया है।
सूत्रों की मानें तो ये वही अर्चना धींगरा हैं, जिन्होंने कुछ समय पहले हरिद्वार के ही पत्रकार एहसान अंसारी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर हर बार विवादों के केंद्र में वही नाम क्यों आता है?
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि देवम मेहता, विश्वास सैनी और अर्चना धींगरा के कहने पर गैस एजेंसी पहुंचे थे। मकसद क्या था—जांच या कुछ और—इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन जो हुआ, उसने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया।
गैस एजेंसी पर पहुंचते ही हालात बिगड़ गए और आरोप है कि देवम मेहता को वहीं बंधक बना लिया गया। अब बड़ा सवाल ये है कि अगर वह सिर्फ एक पत्रकार के तौर पर गए थे, तो फिर उन्हें इस तरह क्यों रोका गया?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब एक और चौंकाने वाली आशंका सामने आ रही है—क्या देवम मेहता के ही करीबी लोगों ने उन्हें फंसा दिया? क्या अंदरखाने कोई ऐसी डील हुई, जिसमें गैस एजेंसी वालों और कुछ पत्रकारों की मिलीभगत थी?
स्थानीय चर्चाओं में ये बात तेजी से फैल रही है कि “जैसी संगत, वैसी रंगत” वाली कहावत यहां सटीक बैठती नजर आ रही है। सवाल ये भी है कि क्या देवम मेहता सिर्फ मोहरा बन गए?
मुकदमा दर्ज होते ही अर्चना धींगरा का रुख बदलना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या ये खुद को बचाने की कोशिश है, या फिर सच्चाई वाकई कुछ और है?
अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
क्या हरिद्वार में पत्रकारिता अब खबरों से ज्यादा ‘सेटिंग’ और ‘साजिश’ का खेल बनती जा रही है?
👉 सच क्या है, ये तो जांच के बाद ही सामने आएगा… लेकिन फिलहाल इस पूरे मामले ने हरिद्वार की पत्रकारिता पर एक बड़ा सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
नोट – अगर आपके फोन में लिंक ना खुले तो इस नंबर 9411111862 को सेव कर ले लिंक खुल जाएगा इसलिए बताया जा रहा है कि कुछ पत्रकार भाईयों की शिकायत है कि लिंक नहीं खुल रहा है
