• February 24, 2024
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सरकार के नये कोड बिल में समाचार चैनलों के रिर्पोटर और कैमरामैन भी होंगे कवर

हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९  पर सुप्रीमकोर्ट के जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा की राय, सरकार के नये कोड बिल में समाचार चैनलों के रिर्पोटर और कैमरामैन भी होंगे कवर, बिना वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट से छेड़छाड़ किये मीडियाकर्मियों को अतिरिक्त लाभ 

केंद्रीय कैबिनेट ने हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९ को मंजूरी दे दी।  इस बिल में पत्रकारों के लिये बने श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें और अन्‍य प्रावधान) अधिनियम १९५५ के साथ साथ श्रमजीवी पत्रकार (निर्धारित वेतन दर) अधिनियम १९५८ को भी शामिल किया गया है। इसपर कई लोगों ने संदेह जताया है कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के इस बिल में शामिल होने पर पत्रकारों के अधिकार सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस पर हमनेपत्रकारों के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले  सुप्रीमकोर्ट के जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा जी से बात की और उनसे निवेदन किया कि सरकार के हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९ के ड्राफ्ट का  अध्ययन कर देशभर के पत्रकारों का मार्गदर्शन करें कि इससे पत्रकारों के अधिकार कितने सुरक्षित रहेंगे और इस बिल से पत्रकारोंको कितना फायदा, कितना नुकसान है। एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने बिल के ड्राफ्ट का अध्ययन किया और अपनी राय रखी। उन्होने कहा कि इस बिल में   पत्रकारों के लिये बने श्रमजीवी पत्रकार और अन्‍य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा शर्तें और अन्‍य प्रावधान) अधिनियम १९५५ के साथ साथ श्रमजीवी पत्रकार (निर्धारित वेतन दर) अधिनियम १९५८ शामिल किया जारहा है जिससे किसी प्रकार के डरने की कोई जरुरत मीडियाकर्मियोंको नहीं है। कुछ चीजों को भी नये बिल में शामिल किया जारहा है जिसमें आडियो विडियो भी शामिल किया गया है जिससे सिनेमा कामगारों के साथ साथ न्यूज चैनलों में काम करने वालेकैमरामैन और रिर्पोटरों की ड्युटी टाईम  भी तय होगी तथा एक तरीके से सरकार उन्हे भी इस बिल में कवर कर रही है जो अब तक वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में अछुते थे। जिससे उन्हे कई लाभ मिलेंगे। उमेश शर्माने कहा कि अबतक वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट मेंड्युटी के दौरान दुर्घटना होने पर घायल होने या मीडियाकर्मियों के मृत्यु होने की दषा में उनके परिजन को मुआवजा का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन  हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल २०१९ में उसे भी शामिल किया गया है। उन्होने कहा कि इस बिल मे कुछ चीजों को और शामिल किया गया है जिसमें यह कानून बन जाने के बाद कंपनियों को अपने कर्मचारियों का सालाना हेल्थ चेकअप करना अनिवार्य होगा। यही नहीं कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए कैंटीन व उनके बच्चों के लिए झूलाघर (क्रेच) की सुविधा देनी होगी। इस  बिल में देश की सभी कंपनियों के कर्मचारियों को अब अपॉइंटमेंट लेटर देना जरूरी किया गया है।  साथ ही उन्हे वेतन देने का एक निश्चित दिन तय करना पड़ेगा।  महिलाओं के लिए वर्किंग आवर ६ बजे सुबह से ७ बजे शाम के बीच ही रहेगा। ७ बजे शाम के बाद अगर वर्किंग आवर तय किया जाता है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। ये सब नया प्वाईंट है और बिना वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट से छेड़छाड़ किये मीडियाकर्मियोंको  ये सुविधायें दी जारही हैं जो अच्छी बात है। यह पूछे जाने पर कि इस बिल से समाचार पत्र कर्मियों को कितना फायदा होगा  या इससे समाचार पत्र कर्मियों को नुकसान होगा। इस पर उमेश शर्मा ने कहा कि पहले ऐसा कोई प्रोविजन नहीं था अब अगर इसे सरकार ला रही है तो यह बुरा नहीं है। मीडिया कर्मियों को इसमें अतिरिक्त लाभ ही मिलेगा। यह पूछे जाने पर कि बिल में अखबार मालिकों को सजा दिये जाने के प्रावधान में रियायत तो नहीं दिया जारहा है एडवोकेट उमेश शर्मा ने कहा कि हर कानून में सजा का प्रावधान है। उन्होने कहा कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट को इसमें एड किया गया है उसमेंसे कोई भी धारा चाहे वह १७ हो या कुछ और उसे हटाया या अलग नहीं किया जारहा है तो उसमें डरने की कोई बात नहींमुझे समझ मेंआरही है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस कोड के जरिये सरकार पूर्व के सभी कानूनों को शिथिल कर कंपनियों के हित में नया कोड ला रही है ताकि इंवेस्टमेंट बढ़े और कंपनियों को ज्यादा फायदा हो? इस पर उमेश शर्मा ने कहा कि कोई कानून शिथिल नहीं हो रहा है। इसकेसमानानंतर क्या कोई कानूनी प्रावधान एक्ट में था. यह जो प्रावधान आये हैं वह पहली बार एक्ट में जोड़े गये हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी
९३२२४११३३५


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