उन्नाव। इंडिया टीवी न्यूज चैनल से जुड़े पत्रकार नवीन सिंह ने स्थानीय पुलिस और भूमाफियाओं की कथित मिलीभगत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ गंगाघाट कोतवाली में दर्ज किया गया मुकदमा झूठा और एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। इस पूरे प्रकरण में गंगाघाट कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार मिश्रा की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।
नवीन सिंह का आरोप है कि उन्होंने हाल ही में सरकारी कुर्क की गई जमीनों की अवैध बिक्री से जुड़े एक बड़े घोटाले पर कुछ सवाल उठाए थे। इसी के बाद उन्हें प्रताड़ित करने की नीयत से मुकदमे में फंसाया गया। इस घोटाले से जुड़े मुख्य आरोपियों में भूमाफिया मुन्नीलाल सैनी और उसका कथित सहयोगी योगेंद्र मिश्रा शामिल हैं, जिनके खिलाफ पहले से ही एफआईआर संख्या 0707/2023 और चार्जशीट संख्या 461B/2024 दर्ज है। इन पर गैंगस्टर एक्ट सहित कई संगीन धाराओं में मामला चल रहा है।
पत्रकार का दावा है कि स्थानीय पुलिस ने बिना किसी स्वतंत्र जांच के सीधे उन्हें आरोपी बना दिया, जो दर्शाता है कि कुछ पुलिस अधिकारी भूमाफिया के साथ सांठगांठ में लिप्त हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस साजिश में आर्थिक लेन-देन हुआ है, जिसमें कुछ दलाल प्रवृत्ति के पत्रकारों की संलिप्तता भी हो सकती है।
भूमि विवाद भी बना मुद्दा
नवीन सिंह ने जानकारी दी कि उनकी भतीजियां—किरण और माधुरी—ने भी गंगाघाट थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा और अवैध बिक्री को लेकर मुन्नीलाल सैनी और योगेंद्र मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके बावजूद, पुलिस की तरफ से कोई ठोस और निष्पक्ष कार्यवाही नहीं की गई है।
मीडिया की भूमिका पर सवाल
नवीन सिंह ने कुछ स्थानीय अखबारों, विशेषकर दैनिक जागरण, पर भी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिना उनका पक्ष जाने एकतरफा खबरें प्रकाशित की गईं, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना?
उन्होंने यह भी कहा कि मंडलायुक्त रोशन जैकब द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद, गंगाघाट पुलिस द्वारा भूमाफिया को “किसान” बताना, पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला देता है और पुलिस की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नवीन सिंह ने शासन-प्रशासन से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों को यदि सच उजागर करने की सजा ऐसे दी जाएगी, तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर खतरा मंडराएगा।
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