हरिद्वार की शांत गलियों में अचानक हड़कंप मच गया, जब स्थानीय पत्रकार देवम मेहता एक खबर की पड़ताल करने पुष्पक गैस एजेंसी पहुंचे। उनके साथ थीं पत्रकार अर्चना धींगरा और न्यूज़ इंडिया के पत्रकार विश्वास सैनी। बताया जा रहा है कि ये टीम गैस एजेंसी में चल रही कुछ अनियमितताओं की जानकारी जुटाने पहुंची थी।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था—कैमरा ऑन, सवाल तैयार और सच सामने लाने की कोशिश। लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने एजेंसी के अंदर कुछ तीखे सवाल उठाने शुरू किए, माहौल अचानक बदल गया।
बंधक बनाने का आरोप
वीडियो फुटेज में साफ दिखाई देता है कि पत्रकार देवम मेहता को एजेंसी के कुछ लोग पकड़कर अंदर ले जाते हैं। आरोप है कि उन्हें जबरन अंदर बंद कर दिया गया और धमकाया गया। कैमरे के सामने ही बहस तेज हो जाती है, और पत्रकारों को डराने की कोशिश की जाती है।
देवम मेहता बार-बार कहते नजर आते हैं कि वो सिर्फ अपना काम कर रहे हैं—लेकिन एजेंसी के लोग इसे “दबाव बनाने की कोशिश” बता रहे थे।
पलटा पूरा मामला
जहां एक तरफ पत्रकार खुद को पीड़ित बता रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पुष्पक गैस एजेंसी ने बड़ा आरोप लगा दिया। एजेंसी का कहना है कि देवम मेहता, अर्चना धींगरा और न्यूज़ इंडिया के पत्रकार विश्वास सैनी ने उनसे 2 लाख रुपये की मांग की थी, और जब पैसे नहीं दिए गए तो उन्होंने खबर के नाम पर दबाव बनाना शुरू किया।
यानी एक ही घटना के दो बिल्कुल अलग-अलग पक्ष—एक तरफ बंधक बनाने और धमकाने का आरोप, दूसरी तरफ रंगदारी मांगने का दावा।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पत्रकारों का कहना है कि जब वे पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचे, तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्हें एक सब इंस्पेक्टर द्वारा आश्वासन दिया गया—
“आप टेंशन मत लो, मामला यहीं सुलझा देंगे।”
लेकिन कुछ ही समय बाद चौंकाने वाली खबर आई—मुकदमा पत्रकारों के खिलाफ दर्ज कर दिया गया।
यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
मिलीभगत का शक?
अब सवाल उठ रहे हैं—
- क्या पुलिस ने बिना पूरी जांच के पत्रकारों पर कार्रवाई कर दी?
- क्या गैस एजेंसी और पुलिस के बीच कोई मिलीभगत है?
- या फिर सच में पत्रकारों ने अपनी सीमाएं लांघीं?
इन सवालों के जवाब अभी साफ नहीं हैं, लेकिन घटना ने पूरे मीडिया जगत में हलचल जरूर मचा दी है।
जनता क्या कह रही है?
स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ लोग पत्रकारों के समर्थन में हैं, तो कुछ का मानना है कि सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
यह मामला सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि एक आईना है—
जिसमें दिखता है कि कैसे एक घटना के कई चेहरे हो सकते हैं।
सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने पत्रकारिता, पुलिस और प्रशासन—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
— bhadas2media (@bhadas2media) March 28, 2026
नोट – अगर आपके फोन में लिंक ना खुले तो इस नंबर 9411111862 को सेव कर ले लिंक खुल जाएगा इसलिए बताया जा रहा है कि कुछ पत्रकार भाईयों की शिकायत है कि लिंक नहीं खुल रहा है
